पहली बार रणथंभौर जा रहे हैं? टाइगर सफारी, सही समय और ट्रिप प्लान की पूरी जानकारी

चित्र
  अगर आप पहली बार रणथंभौर घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो आपके मन में कई सवाल होंगे—रणथंभौर कब जाना चाहिए, कितने दिन रुकना सही रहेगा, टाइगर सफारी कैसे बुक करें, एक सफारी काफी है या दो करनी चाहिए और सबसे बड़ा सवाल, क्या रणथंभौर में बाघ जरूर दिखाई देता है? इन सवालों के जवाब जानना इसलिए जरूरी है क्योंकि रणथंभौर की यात्रा किसी सामान्य sightseeing trip जैसी नहीं है। यहां आपका अनुभव मौसम, सफारी के समय, जंगल की परिस्थितियों और थोड़े से भाग्य पर भी निर्भर करता है। मेरी नजर में रणथंभौर को सिर्फ “बाघ देखने की जगह” समझना सबसे बड़ी गलती होगी। सवाई माधोपुर के पास स्थित यह इलाका जंगल, झीलों, पहाड़ियों, वन्यजीवों और ऐतिहासिक रणथंभौर किले का ऐसा मेल है, जहां एक ही यात्रा में आपको प्रकृति और इतिहास दोनों को करीब से देखने का मौका मिलता है। अगर आप अपनी पहली यात्रा को थोड़ा सोच-समझकर प्लान करते हैं, तो सिर्फ एक सफारी के बजाय पूरा रणथंभौर अनुभव करना ज्यादा यादगार हो सकता है। पहली बार रणथंभौर जाने के लिए कितने दिन काफी हैं? अगर आप पहली बार रणथंभौर जा रहे हैं, तो 2 रात और 3 दिन का trip एक अच्छा विकल्...

प्रकृति की गोद में 'डिस्को डांसर': ऊटी की वादियों और मिथुन चक्रवर्ती का अनूठा रिश्ता

 


सिनेमा की चकाचौंध और मुंबई की भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर, जब हम शांति और सुकून की तलाश करते हैं, तो नीलगिरी की पहाड़ियों में बसा ऊटी जेहन में आता है। लेकिन ऊटी का जिक्र बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती के बिना अधूरा है। 'मिथुन दा' के लिए यह महज एक हिल स्टेशन नहीं, बल्कि उनकी आत्मा का एक हिस्सा है। सत्तर और अस्सी के दशक में अपनी शानदार अदाकारी और डांस से पूरी दुनिया को दीवाना बनाने वाले मिथुन दा ने करियर के एक पड़ाव पर ऊटी की शांत वादियों को अपना ठिकाना बनाया। यहाँ की मखमली हरियाली, ऊँचे देवदार के वृक्ष और धुंध की चादर ओढ़े पहाड़ों के बीच उन्होंने न केवल अपना आशियाना बनाया, बल्कि 'मोनार्क ग्रुप ऑफ होटल्स' के जरिए एक व्यावसायिक साम्राज्य भी खड़ा किया।

कहा जाता है कि मिथुन चक्रवर्ती के लिए ऊटी बेहद भाग्यशाली रहा है; उनकी वहाँ शूट हुई लगभग हर फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल रही। इसी जुड़ाव ने उन्हें प्रकृति के और करीब ला दिया। आज भी जब वे अपने होटल 'द मोनार्क' की बालकनी से ऊटी की ढलानों को देखते हैं, तो उनकी आँखों में वही चमक होती है जो प्रकृति के किसी प्रेमी की होती है। वे एक ऐसे अभिनेता हैं जो अपने बगीचों, पेड़-पौधों और दर्जनों पालतू कुत्तों के बीच अपनी असली खुशी ढूंढते हैं। ऊटी की ताजी हवा और वहां का शांत वातावरण उन्हें वह सादगी प्रदान करता है, जो आज के शोर-शराबे वाले दौर में दुर्लभ है। मिथुन दा का ऊटी में होना यह साबित करता है कि सफलता के शिखर पर पहुँचने के बाद भी इंसान की असल शांति कुदरत के आगोश में ही छिपी है। पहाड़ों की यह खामोशी और प्रकृति का यह बेमिसाल सौंदर्य ही है जो इस 'ग्रैंड मास्टर' को आज भी तरोताजा और ऊर्जावान बनाए रखता है।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा के लिए ऑनलाइन पंजीकरण आज से शुरू

दुनिया की पहली फोटो की कहानी

प्रतापगढ़ विलेज थीम रिज़ॉर्ट Haryana — शहर के शोर से दूर देहात की सुकून भरी झलक

कौसानी की चोटी से एक सुबह सूर्योदय ज़रूर देखें ,यह पल सचमुच जादुई है

चौखी धानी: जयपुर में संस्कृति, कला और देहात की आत्मा को भी अपने साथ समेटे हुए है