ओणम — केरल का प्रमुख त्योहार

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  ओणम केरल का सबसे प्रसिद्ध और महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह त्योहार खुशहाली, प्रेम, भाईचारे और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।   ओणम मुख्य रूप से राजा महाबली की याद में मनाया जाता है। मान्यता है कि राजा महाबली अपनी प्रजा से मिलने हर वर्ष केरल आते हैं।ओणम के अवसर पर घरों के आंगन में रंग-बिरंगे फूलों से पुक्कलम बनाया जाता है। लोग नए कपड़े पहनते हैं और पारंपरिक ओणम सद्या का आनंद लेते हैं। केरल की प्रसिद्ध नौका दौड़ , लोकनृत्य और पारंपरिक कार्यक्रम इस त्योहार को और भी आकर्षक बना देते हैं। ओणम हमें प्रेम, समानता और मिल-जुलकर रहने का संदेश देता है। यही कारण है कि यह त्योहार केरल की संस्कृति और परंपरा की सुंदर पहचान माना जाता है। 

मेहंदीपुर बालाजी: जहाँ विज्ञान भी नतमस्तक है


 राजस्थान की अरावली पर्वत श्रृंखलाओं के बीच बसा मेहंदीपुर बालाजी का धाम केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि एक जीवंत आस्था का केंद्र है जहाँ विज्ञान और तर्क भी हार मान लेते हैं। दौसा जिले में स्थित यह पावन स्थल हनुमान जी के 'बाल रूप' को समर्पित है, जिन्हें यहाँ संकट मोचन और दुखों के विनाशक के रूप में पूजा जाता है। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसकी स्वयंभू मूर्ति है, जो किसी कलाकार के हाथों से नहीं बनी बल्कि चट्टान के एक हिस्से के रूप में प्रकट हुई है। इस मूर्ति के सीने के बाईं ओर एक सूक्ष्म छिद्र है जिससे निरंतर जल की धारा बहती रहती है, जिसे भक्तगण दिव्य चरणामृत के रूप में ग्रहण करते हैं।

यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं के लिए कुछ विशेष नियम हैं जिनका पालन करना अनिवार्य माना जाता है, जैसे कि मंदिर परिसर के भीतर कुछ मर्यादाओं का पालन करना। कई भक्त अपनी श्रद्धा और विश्वास के साथ यहाँ विशेष अनुष्ठान करते हैं। सवामणी का भोग लगाने और दरख्वास्त करने की परंपराएँ भक्तों के अटूट विश्वास का प्रतीक हैं। मेहंदीपुर बालाजी का धाम उन लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है जो अपनी आस्था को गहरा करना चाहते हैं।

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