लोग कहते हैं दुनिया तेजी से बदल रही है, लेकिन किस दिशा में ?

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  अक्सर लोगों को कहते सुना जाता है कि दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है। पहले जैसा समय अब नहीं रहा। तकनीक बदल गई है, लोगों की सोच बदल रही है और जिंदगी जीने का तरीका भी पहले से अलग हो गया है। लेकिन कभी आपने रुककर सोचा है कि आखिर यह दुनिया बदल किस दिशा में रही है? क्या हम सच में बेहतर भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं, या सिर्फ हमारी जिंदगी की रफ्तार तेज हो गई है? तकनीक आगे बढ़ रही है, इंसान कितना आगे बढ़ा है? आज मोबाइल फोन के जरिए दुनिया के किसी भी कोने में बैठे व्यक्ति से कुछ ही सेकंड में बात की जा सकती है। इंटरनेट ने जानकारी को हमारी उंगलियों तक पहुँचा दिया है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे नए साधन कई कामों को आसान बना रहे हैं। जो काम पहले घंटों या दिनों में होते थे, उनमें से कई अब कुछ मिनटों में पूरे हो जाते हैं। यह बदलाव निश्चित रूप से हमारी जिंदगी को सुविधाजनक बना रहा है। लेकिन एक सवाल अब भी बाकी है। क्या तकनीक के आगे बढ़ने के साथ इंसान के भीतर भी उतना ही बदलाव आया है? हमारे पास दूसरों से जुड़े रहने के अधिक साधन हैं, फिर भी कई बार अपने ही लोगों के लिए समय निकालना मुश्किल हो जाता है। जिंदगी...

बसंती आभा में सराबोर आगरा का 'दयामय' dayalbagh

 


ताजनगरी आगरा का दयालबाग क्षेत्र बसंत पंचमी के पावन अवसर पर एक अलग ही आध्यात्मिक छटा बिखेरता नजर आता है। यहाँ बसंत केवल ऋतु परिवर्तन का संकेत नहीं, बल्कि श्रद्धा और सेवा का संगम है। राधास्वामी मत के अनुयायियों के लिए यह दिन ऐतिहासिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि 20 जनवरी 1915 को बसंत के दिन ही पांचवें आचार्य हुजूर साहब महाराज ने 'मुबारक कुआं' के पास शहतूत का पौधा लगाकर इस पवित्र कॉलोनी की नींव रखी थी। साथ ही, इसी दिन राधास्वामी मत के संस्थापक परम पुरुष पूरन धनी स्वामीजी महाराज ने सन 1861 में पहली बार सार्वजनिक सत्संग की शुरुआत की थी, जिसे राधास्वामी संवत के अनुसार नए वर्ष का शुभारंभ भी माना जाता है।

उत्सव की शुरुआत तड़के सुबह से ही खेतों में होने वाले शब्द-पाठ और सामूहिक श्रमदान से होती है, जहाँ बच्चे, बूढ़े और जवान सभी पीले वस्त्रों में सजकर सेवा कार्य में जुट जाते हैं। पूरा वातावरण 'ऋतु बसंत अब आई' के मधुर स्वरों से गूंज उठता है।  रिपोर्ट के अनुसार, दयालबाग की गलियाँ और संस्थान पीले फूलों और आकर्षक सजावट से सज जाते हैं। रात के समय पूरे क्षेत्र को रंग-बिरंगी रोशनी से रोशन किया जाता है, जो इसे किसी स्वर्ग से कम नहीं बनाता। यहाँ स्थित दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट में भी प्रदर्शनी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है, जिसमें देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु शामिल होने पहुँचते हैं। आध्यात्मिकता और आधुनिक शिक्षा के इस अद्भुत केंद्र में बसंत का उत्सव मानवता और प्रेम का संदेश देता है।

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