फोन पर वीडियो देखने का नशा: कितना खतरनाक है?

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  सुबह आंख खुलते ही फोन पर वीडियो देखना, खाना खाते समय रील्स चलाना, खाली समय में लगातार शॉर्ट वीडियो स्क्रॉल करना और रात को सोने से पहले “बस एक वीडियो और” कहना—आज यह आदत बहुत सामान्य हो गई है। वीडियो देखना अपने आप में नुकसानदायक नहीं है। फोन से मनोरंजन के साथ-साथ पढ़ाई, समाचार और जानकारी भी मिलती है। समस्या तब शुरू होती है जब वीडियो देखने का समय हमारे नियंत्रण से बाहर होने लगे और जरूरी काम, नींद, पढ़ाई, नौकरी या परिवार के साथ बिताया समय पीछे छूटने लगे। यही वजह है कि फोन पर वीडियो देखने की आदत कब सामान्य मनोरंजन से आगे बढ़ जाती है और कब चिंता का कारण बन सकती है, इसे समझना जरूरी है। क्या फोन पर वीडियो देखना सच में “नशा” है? बोलचाल की भाषा में लोग किसी ऐसी आदत को “नशा” कह देते हैं जिसे छोड़ना मुश्किल महसूस हो। लेकिन हर व्यक्ति जो लंबे समय तक वीडियो देखता है, उसे चिकित्सकीय रूप से “आदी” कहना सही नहीं होगा। असल चिंता तब होती है जब व्यक्ति वीडियो देखने पर नियंत्रण नहीं रख पाता, दूसरी जरूरी गतिविधियों पर उसका असर पड़ने लगता है और नुकसान दिखाई देने के बावजूद वह अपनी आदत को कम नहीं कर पाता।...

बसंती आभा में सराबोर आगरा का 'दयामय' dayalbagh

 


ताजनगरी आगरा का दयालबाग क्षेत्र बसंत पंचमी के पावन अवसर पर एक अलग ही आध्यात्मिक छटा बिखेरता नजर आता है। यहाँ बसंत केवल ऋतु परिवर्तन का संकेत नहीं, बल्कि श्रद्धा और सेवा का संगम है। राधास्वामी मत के अनुयायियों के लिए यह दिन ऐतिहासिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि 20 जनवरी 1915 को बसंत के दिन ही पांचवें आचार्य हुजूर साहब महाराज ने 'मुबारक कुआं' के पास शहतूत का पौधा लगाकर इस पवित्र कॉलोनी की नींव रखी थी। साथ ही, इसी दिन राधास्वामी मत के संस्थापक परम पुरुष पूरन धनी स्वामीजी महाराज ने सन 1861 में पहली बार सार्वजनिक सत्संग की शुरुआत की थी, जिसे राधास्वामी संवत के अनुसार नए वर्ष का शुभारंभ भी माना जाता है।

उत्सव की शुरुआत तड़के सुबह से ही खेतों में होने वाले शब्द-पाठ और सामूहिक श्रमदान से होती है, जहाँ बच्चे, बूढ़े और जवान सभी पीले वस्त्रों में सजकर सेवा कार्य में जुट जाते हैं। पूरा वातावरण 'ऋतु बसंत अब आई' के मधुर स्वरों से गूंज उठता है।  रिपोर्ट के अनुसार, दयालबाग की गलियाँ और संस्थान पीले फूलों और आकर्षक सजावट से सज जाते हैं। रात के समय पूरे क्षेत्र को रंग-बिरंगी रोशनी से रोशन किया जाता है, जो इसे किसी स्वर्ग से कम नहीं बनाता। यहाँ स्थित दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट में भी प्रदर्शनी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है, जिसमें देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु शामिल होने पहुँचते हैं। आध्यात्मिकता और आधुनिक शिक्षा के इस अद्भुत केंद्र में बसंत का उत्सव मानवता और प्रेम का संदेश देता है।

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