ज़ायके का संगम: वो शहर जहाँ की सुबह कढ़ी कचौड़ी की खुशबू से होती है गुलज़ार
| chettinad havelis architecture |
चेट्टीनाड की सबसे बड़ी पहचान इसकी भव्य हवेलियाँ हैं। इन हवेलियों को नट्टुकोट्टई चेट्टियार समुदाय ने बनवाया था, जो कभी अंतरराष्ट्रीय व्यापारी हुआ करते थे। इन घरों की बनावट में दुनिया की झलक दिखाई देती है। कहीं इटली का संगमरमर है, तो कहीं बर्मा की सागौन लकड़ी।
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बेल्जियम के शीशे और जापान की टाइलें इन हवेलियों को किसी संग्रहालय जैसा बना देती हैं। हर दरवाज़ा, हर आंगन अपने भीतर एक कहानी छुपाए हुए है।
अगर वास्तुकला आँखों को तृप्त करती है, तो चेट्टीनाड का खाना आत्मा को। यहाँ का भोजन अपने तीखे और गहरे स्वाद के लिए जाना जाता है। मसालों का ऐसा संतुलन यहाँ देखने को मिलता है जो कहीं और मुश्किल से मिलता है। चेट्टीनाड चिकन, पेपर चिकन और पारंपरिक दक्षिण भारतीय व्यंजन यहाँ केवल भोजन नहीं, बल्कि संस्कृति का हिस्सा हैं। हर निवाला इस धरती की पहचान को दर्शाता है।
चेट्टीनाड की असली सुंदरता इसके लोगों और जीवनशैली में छिपी है। यहाँ सुबह मंदिर की घंटियों से शुरू होती है और शाम धीमी रफ्तार में ढलती है। त्योहार, परंपराएँ और सामाजिक मेलजोल आज भी पूरी सादगी और सम्मान के साथ निभाए जाते हैं। ऐसा लगता है मानो समय यहाँ रुककर साँस ले रहा हो।
जो यात्री भीड़-भाड़ से दूर शांति, इतिहास और वास्तविक भारत को महसूस करना चाहते हैं, उनके लिए चेट्टीनाड एक आदर्श स्थान है। यह जगह आपको आकर्षित करने के लिए चकाचौंध का सहारा नहीं लेती, बल्कि अपनी सादगी से बाँध लेती है।
चेट्टीनाड की यात्रा एक जगह देखने की नहीं, बल्कि एक एहसास को जीने की यात्रा है। यह आपको धीरे-धीरे अपने रंग में रंग लेती है और लौटने के बाद भी मन वहीं अटका रहता है।
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