लोग कहते हैं दुनिया तेजी से बदल रही है, लेकिन किस दिशा में ?

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  अक्सर लोगों को कहते सुना जाता है कि दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है। पहले जैसा समय अब नहीं रहा। तकनीक बदल गई है, लोगों की सोच बदल रही है और जिंदगी जीने का तरीका भी पहले से अलग हो गया है। लेकिन कभी आपने रुककर सोचा है कि आखिर यह दुनिया बदल किस दिशा में रही है? क्या हम सच में बेहतर भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं, या सिर्फ हमारी जिंदगी की रफ्तार तेज हो गई है? तकनीक आगे बढ़ रही है, इंसान कितना आगे बढ़ा है? आज मोबाइल फोन के जरिए दुनिया के किसी भी कोने में बैठे व्यक्ति से कुछ ही सेकंड में बात की जा सकती है। इंटरनेट ने जानकारी को हमारी उंगलियों तक पहुँचा दिया है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे नए साधन कई कामों को आसान बना रहे हैं। जो काम पहले घंटों या दिनों में होते थे, उनमें से कई अब कुछ मिनटों में पूरे हो जाते हैं। यह बदलाव निश्चित रूप से हमारी जिंदगी को सुविधाजनक बना रहा है। लेकिन एक सवाल अब भी बाकी है। क्या तकनीक के आगे बढ़ने के साथ इंसान के भीतर भी उतना ही बदलाव आया है? हमारे पास दूसरों से जुड़े रहने के अधिक साधन हैं, फिर भी कई बार अपने ही लोगों के लिए समय निकालना मुश्किल हो जाता है। जिंदगी...

अवध की शाम आपके नाम : लखनऊ

 


लखनऊ…

एक शहर नहीं, तहज़ीब की धड़कन है।
जहाँ शाम ढलती नहीं, सलीके से उतरती है।

अवध की इस धरती पर जब सूरज सरयू की याद में झुकता है,
तो हवाओं में इत्र-सा घुल जाता है लखनऊ।
यहाँ गलियाँ भी अदब से बोलती हैं
और लोग मुस्कान में भी नज़ाकत ओढ़े रहते हैं।

लखनऊ की शाम मतलब—
चाय की प्याली में घुली गप्पें,
रेहड़ी पर सजी टिक्की की खुशबू,
और चौक की गलियों में बिखरी हुई इतिहास की परछाइयाँ।

अमीनाबाद की रौनक हो या
हज़रतगंज की ठहरी हुई चाल,
हर जगह एक ही बात कहती है—
“पहले आप।”

अवधी बोली में कहें तो,

“लखनऊ अइसा शहर है
जिहाँ दिल पहिले जुड़ जात है,
फिर आदमी।”

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