अवध की शाम आपके नाम : लखनऊ

 


लखनऊ…

एक शहर नहीं, तहज़ीब की धड़कन है।
जहाँ शाम ढलती नहीं, सलीके से उतरती है।

अवध की इस धरती पर जब सूरज सरयू की याद में झुकता है,
तो हवाओं में इत्र-सा घुल जाता है लखनऊ।
यहाँ गलियाँ भी अदब से बोलती हैं
और लोग मुस्कान में भी नज़ाकत ओढ़े रहते हैं।

लखनऊ की शाम मतलब—
चाय की प्याली में घुली गप्पें,
रेहड़ी पर सजी टिक्की की खुशबू,
और चौक की गलियों में बिखरी हुई इतिहास की परछाइयाँ।

अमीनाबाद की रौनक हो या
हज़रतगंज की ठहरी हुई चाल,
हर जगह एक ही बात कहती है—
“पहले आप।”

अवधी बोली में कहें तो,

“लखनऊ अइसा शहर है
जिहाँ दिल पहिले जुड़ जात है,
फिर आदमी।”

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा के लिए ऑनलाइन पंजीकरण आज से शुरू

दुनिया की पहली फोटो की कहानी

कौसानी की चोटी से एक सुबह सूर्योदय ज़रूर देखें ,यह पल सचमुच जादुई है

प्रतापगढ़ विलेज थीम रिज़ॉर्ट Haryana — शहर के शोर से दूर देहात की सुकून भरी झलक

ग्रीस में 3,100 से अधिक 100 साल की उम्र वाले लोग: लंबी उम्र का रहस्य